श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 5: श्रीराम, लक्ष्मण और सीता का शरभङ्ग मुनि के आश्रम पर जाना, देवताओं का दर्शन करना और मुनि से सम्मानित होना तथा शरभङ्ग मुनि का ब्रह्मलोक-गमन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.5.29 
अहं ज्ञात्वा नरव्याघ्र वर्तमानमदूरत:।
ब्रह्मलोकं न गच्छामि त्वामदृष्ट्वा प्रियातिथिम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
'पुरुषसिंह! परंतु जब मुझे ज्ञात हुआ कि आप इस आश्रम के निकट आये हैं, तब मैंने निश्चय किया कि आप जैसे प्रिय अतिथि के दर्शन किये बिना मैं ब्रह्मलोक नहीं जाऊँगा॥ 29॥
 
'Purushasingh! But when I came to know that you have come near this hermitage, then I decided that I will not go to Brahmaloka without seeing a dear guest like you.॥ 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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