श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 5: श्रीराम, लक्ष्मण और सीता का शरभङ्ग मुनि के आश्रम पर जाना, देवताओं का दर्शन करना और मुनि से सम्मानित होना तथा शरभङ्ग मुनि का ब्रह्मलोक-गमन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.5.23 
जितवन्तं कृतार्थं हि तदाहमचिरादिमम्।
कर्म ह्यनेन कर्तव्यं महदन्यै: सुदुष्करम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
उसे एक महान् कार्य करना है, जो दूसरों के लिए अत्यन्त कठिन है। जब वह रावण को परास्त करने में सफल हो जाएगा और अपना कर्तव्य पूरा कर लेगा, तब मैं शीघ्र ही आकर उससे मिलूँगा।॥23॥
 
‘He has to perform a great deed which is very difficult for others to accomplish. When he will be successful in defeating Ravan and will fulfill his duty, then I will soon come and see him.’॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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