श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 5: श्रीराम, लक्ष्मण और सीता का शरभङ्ग मुनि के आश्रम पर जाना, देवताओं का दर्शन करना और मुनि से सम्मानित होना तथा शरभङ्ग मुनि का ब्रह्मलोक-गमन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.5.18 
एतद्धि किल देवानां वयो भवति नित्यदा।
यथेमे पुरुषव्याघ्रा दृश्यन्ते प्रियदर्शना:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहा जाता है कि ये महापुरुष जिस अवस्था में दिखाई देते हैं, देवता भी उसी अवस्था में रहते हैं। उन्हें देखना कितना सुन्दर लगता है॥18॥
 
‘It is said that the deities are always in the same state as these great men appear. How lovely it is to see them.॥ 18॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd