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श्लोक  3.49.8 
दशास्यो विंशतिभुजो बभूव क्षणदाचर:।
स परिव्राजकच्छद्म महाकायो विहाय तत्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उस विशाल रात्रिचर प्राणी ने भ्रमणशील साधु का वेश त्यागकर दस मुख और बीस भुजाएँ प्राप्त कर लीं।
 
That huge nocturnal creature, abandoning the disguise of a wandering monk, acquired ten faces and twenty arms.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)