Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.49.26: हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले आर्यपुत्र! आप कुमार्ग पर चलने वाले अभिमानी मनुष्यों को दण्ड देकर उन्हें फिर से सन्मार्ग पर लाते हैं, फिर रावण जैसे पापी को दण्ड क्यों नहीं देते?॥ 26॥ | ramayan सर्ग 3.49: रावण द्वारा सीता का अपहरण, सीता का विलाप और उनके द्वारा जटायु का दर्शन । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ननु नामाविनीतानां विनेतासि परंतप।
कथमेवंविधं पापं न त्वं शाधि हि रावणम्॥ २६॥
अनुवाद
हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले आर्यपुत्र! आप कुमार्ग पर चलने वाले अभिमानी मनुष्यों को दण्ड देकर उन्हें फिर से सन्मार्ग पर लाते हैं, फिर रावण जैसे पापी को दण्ड क्यों नहीं देते?॥ 26॥
'O Aryaputra, who torments the enemies! You punish the arrogant men who follow the wrong path and bring them back on the right path, then why do you not punish such a sinner like Ravana?॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥