Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.49.22: सीता के हृदय में रावण के प्रति कोई कामना नहीं थी - वह उससे पूर्णतः विरक्त थीं और रथ पर घायल सर्प की भाँति स्वयं को उसकी कैद से मुक्त करने के लिए छटपटा रही थीं। ऐसी अवस्था में काम-ग्रस्त राक्षस उन्हें लेकर आकाश में उड़ गया। | ramayan सर्ग 3.49: रावण द्वारा सीता का अपहरण, सीता का विलाप और उनके द्वारा जटायु का दर्शन । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तामकामां स कामार्त: पन्नगेन्द्रवधूमिव।
विचेष्टमानामादाय उत्पपाताथ रावण:॥ २२॥
अनुवाद
सीता के हृदय में रावण के प्रति कोई कामना नहीं थी - वह उससे पूर्णतः विरक्त थीं और रथ पर घायल सर्प की भाँति स्वयं को उसकी कैद से मुक्त करने के लिए छटपटा रही थीं। ऐसी अवस्था में काम-ग्रस्त राक्षस उन्हें लेकर आकाश में उड़ गया।
Sita had no desire for Ravana in her heart - she was completely detached from him and was struggling on the chariot like a wounded snake to free herself from his captivity. In that state, the lust-stricken demon took her and flew into the sky.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥