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ramayan 3.49.12: 'भद्रे! मुझे दीर्घकाल तक स्वीकार करो। मैं तुम्हारा वांछनीय एवं प्रशंसनीय पति बनूँगा तथा कभी भी तुम्हारी इच्छा के विरुद्ध आचरण नहीं करूँगा।'   |   ramayan सर्ग 3.49: रावण द्वारा सीता का अपहरण, सीता का विलाप और उनके द्वारा जटायु का दर्शन   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.49.12 
मां भजस्व चिराय त्वमहं श्लाघ्य: पतिस्तव।
नैव चाहं क्वचिद् भद्रे करिष्ये तव विप्रियम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
'भद्रे! मुझे दीर्घकाल तक स्वीकार करो। मैं तुम्हारा वांछनीय एवं प्रशंसनीय पति बनूँगा तथा कभी भी तुम्हारी इच्छा के विरुद्ध आचरण नहीं करूँगा।'
 
'Bhadra! Accept me for a long time. I will be a desirable and praiseworthy husband for you and will never behave against your wishes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)