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श्लोक 3.48.9  |
निष्कम्पपत्रास्तरवो नद्यश्च स्तिमितोदका:।
भवन्ति यत्र तत्राहं तिष्ठामि च चरामि च॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| 'मैं जहाँ भी रहता हूँ या यात्रा करता हूँ, वहाँ वृक्षों के पत्ते भी नहीं हिलते और नदियों का जल भी शांत हो जाता है।॥9॥ |
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| 'Wherever I stay or travel, even the leaves of the trees do not move and the water of the rivers becomes still.॥ 9॥ |
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