श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 48: रावण के द्वारा अपने पराक्रम का वर्णन और सीता द्वारा उसको कड़ी फटकार  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.48.9 
निष्कम्पपत्रास्तरवो नद्यश्च स्तिमितोदका:।
भवन्ति यत्र तत्राहं तिष्ठामि च चरामि च॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'मैं जहाँ भी रहता हूँ या यात्रा करता हूँ, वहाँ वृक्षों के पत्ते भी नहीं हिलते और नदियों का जल भी शांत हो जाता है।॥9॥
 
'Wherever I stay or travel, even the leaves of the trees do not move and the water of the rivers becomes still.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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