श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 48: रावण के द्वारा अपने पराक्रम का वर्णन और सीता द्वारा उसको कड़ी फटकार  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.48.24 
जीवेच्चिरं वज्रधरस्य पश्चा-
च्छचीं प्रधृष्याप्रतिरूपरूपाम्।
न मादृशीं राक्षस धर्षयित्वा
पीतामृतस्यापि तवास्ति मोक्ष:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
'राक्षस! वज्रधारी इन्द्र की अतुलनीय सुन्दरी पत्नी शची का अपमान करने पर भी मनुष्य बहुत समय तक जीवित रह सकता है; किन्तु यदि तू मुझ जैसी स्त्री का अपमान करके अमृत पी भी ले, तो भी जीवित रहते तुझे मोक्ष नहीं मिल सकेगा।'॥ 24॥
 
'Demon! It is possible that one may remain alive for a long time even after insulting Shachi, the incomparably beautiful wife of the thunderbolt-bearer Indra; but even if you insult a woman like me and drink the nectar, you will not be able to get salvation while you are alive.'॥ 24॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽरण्यकाण्डेऽष्टचत्वारिंश: सर्ग:॥ ४८॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अरण्यकाण्डमें अड़तालीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ४८॥
 
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