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श्लोक 3.48.23  |
अपहृत्य शचीं भार्यां शक्यमिन्द्रस्य जीवितुम्।
नहि रामस्य भार्यां मामानीय स्वस्तिमान् भवेत्॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| 'इन्द्र की पत्नी शची का हरण करके कोई बच सकता है; परन्तु मुझ राम की पत्नी सीता का हरण करके कोई नहीं बच सकता।॥ 23॥ |
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| 'It is possible that someone may survive after abducting Indra's wife Shachi; but no one can survive after abducting me, Sita, the wife of Rama.॥ 23॥ |
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