श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 48: रावण के द्वारा अपने पराक्रम का वर्णन और सीता द्वारा उसको कड़ी फटकार  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.48.21 
कथं वैश्रवणं देवं सर्वदेवनमस्कृतम्।
भ्रातरं व्यपदिश्य त्वमशुभं कर्तुमिच्छसि॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'हे भगवान् कुबेर तो सभी देवताओं द्वारा पूजित हैं। उन्हें अपना भाई कहकर तुम ऐसा पापकर्म कैसे करना चाहते हो?॥ 21॥
 
'Oh! Lord Kubera is worshiped by all the gods. How can you want to commit such a sinful act by calling him your brother?॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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