श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 48: रावण के द्वारा अपने पराक्रम का वर्णन और सीता द्वारा उसको कड़ी फटकार  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.48.14 
भुञ्जाना मानुषान् भोगान् दिव्यांश्च वरवर्णिनि।
न स्मरिष्यसि रामस्य मानुषस्य गतायुष:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'सुन्दरी! लंका में दैवी और मानवीय सुखों का उपभोग करते समय तुम कभी भी उस मानव राम को याद नहीं करोगी, जिसका जीवन अब समाप्त हो चुका है।॥ 14॥
 
'Beautiful girl! While enjoying the divine and human pleasures in Lanka you will never remember the human Rama, whose life has now come to an end.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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