श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 48: रावण के द्वारा अपने पराक्रम का वर्णन और सीता द्वारा उसको कड़ी फटकार  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.48.1 
एवं ब्रुवत्यां सीतायां संरब्ध: परुषं वच:।
ललाटे भ्रुकुटिं कृत्वा रावण: प्रत्युवाच ह॥ १॥
 
 
अनुवाद
सीता के ऐसा कहने पर रावण अत्यन्त क्रोधित हो गया और उसने भौंहें चढ़ाकर कठोर स्वर में कहा-॥1॥
 
Ravana became very angry when Sita said this and he raised his eyebrows and spoke in a harsh tone -॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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