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ramayan 3.47.18-19: श्री राम के सौतेले भाई लक्ष्मण बड़े पराक्रमी हैं। युद्धस्थल में शत्रुओं का संहार करने वाले सिंहरूपी लक्ष्मण श्री राम के सहायक, भाई, ब्रह्मचारी और उत्तम व्रतों का दृढ़ पालन करने वाले हैं।॥18-19॥   |   ramayan सर्ग 3.47: सीता का रावण को अपना और पति का परिचय देकर वन में आने का कारण बताना, रावण का उन्हें अपनी पटरानी बनाने की इच्छा प्रकट करना और सीता का उसे फटकारना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 47: सीता का रावण को अपना और पति का परिचय देकर वन में आने का कारण बताना, रावण का उन्हें अपनी पटरानी बनाने की इच्छा प्रकट करना और सीता का उसे फटकारना  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  3.47.18-19 
तस्य भ्राता तु वैमात्रो लक्ष्मणो नाम वीर्यवान्॥ १८॥
रामस्य पुरुषव्याघ्र: सहाय: समरेऽरिहा।
स भ्राता लक्ष्मणो नाम ब्रह्मचारी दृढव्रत:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
श्री राम के सौतेले भाई लक्ष्मण बड़े पराक्रमी हैं। युद्धस्थल में शत्रुओं का संहार करने वाले सिंहरूपी लक्ष्मण श्री राम के सहायक, भाई, ब्रह्मचारी और उत्तम व्रतों का दृढ़ पालन करने वाले हैं।॥18-19॥
 
‘Sri Rama's half brother Lakshmana is very valiant. The lion-man Lakshmana, who kills enemies in the battlefield, is Shri Rama's assistant, brother, celibate and a firm follower of the best vows.॥ 18-19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)