श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 46: रावण का साधुवेष में सीता के पास जाकर उनका परिचय पूछना और सीता का आतिथ्य के लिये उसे आमन्त्रित करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.46.4 
परिव्राजकरूपेण वैदेहीमन्ववर्तत।
तामाससादातिबलो भ्रातृभ्यां रहितां वने॥ ४॥
 
 
अनुवाद
अत्यंत शक्तिशाली रावण ने जंगल में एक खानाबदोश का वेश धारण किया और विदेह की पुत्री सीता से मिलने गया, जो अपने दो भाइयों, श्री राम और लक्ष्मण के बिना अकेली थी।
 
The extremely powerful Ravana assumed the guise of a nomad in the forest and went to meet Sita, the daughter of Videha, who was alone without her two brothers, Sri Rama and Lakshmana.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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