श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 46: रावण का साधुवेष में सीता के पास जाकर उनका परिचय पूछना और सीता का आतिथ्य के लिये उसे आमन्त्रित करना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.46.34 
उपानीयासनं पूर्वं पाद्येनाभिनिमन्त्र्य च।
अब्रवीत् सिद्धमित्येव तदा तं सौम्यदर्शनम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
पहले उन्होंने उसे बैठने के लिए आसन और पैर धोने के लिए जल दिया। फिर बाहर से विनम्र दिखने वाले अतिथि को भोजन के लिए आमंत्रित किया और कहा, 'ब्राह्मण! भोजन तैयार है, कृपया ग्रहण करें।'
 
First he offered him a seat to sit and water to wash his feet. Then he invited the guest, who appeared gentle from outside, to have food and said, 'Brahmin! Food is ready, please have it'.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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