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श्लोक 3.46.28-29h  |
नेह गच्छन्ति गन्धर्वा न देवा न च किन्नरा:॥ २८॥
राक्षसानामयं वास: कथं तु त्वमिहागता। |
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| अनुवाद |
| 'यहाँ गंधर्व, देवता और किन्नर नहीं आते। यह तो राक्षसों का निवास है, फिर तुम यहाँ कैसे आए?' |
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| ‘Gandharvas, gods and Kinnars do not come here. This is the abode of demons, then how did you come here? 28 1/2. |
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