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श्लोक 3.44.11  |
ग्रहीतुकामं दृष्ट्वा तं पुनरेवाभ्यधावत।
तत्क्षणादेव संत्रासात् पुनरन्तर्हितोऽभवत्॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| जब उसने देखा कि भगवान् राम उसे पकड़ने का प्रयत्न कर रहे हैं, तब वह पुनः भाग गया और भय के मारे तुरन्त ही अदृश्य हो गया ॥11॥ |
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| When he saw that Lord Rama was trying to capture him, he ran away again and out of fear instantly disappeared again. ॥ 11॥ |
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