श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 44: श्रीराम के द्वारा मारीच का वध और उसके द्वारा सीता और लक्ष्मण के पुकारने का शब्द सुनकर श्रीराम की चिन्ता  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.44.11 
ग्रहीतुकामं दृष्ट्वा तं पुनरेवाभ्यधावत।
तत्क्षणादेव संत्रासात् पुनरन्तर्हितोऽभवत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जब उसने देखा कि भगवान् राम उसे पकड़ने का प्रयत्न कर रहे हैं, तब वह पुनः भाग गया और भय के मारे तुरन्त ही अदृश्य हो गया ॥11॥
 
When he saw that Lord Rama was trying to capture him, he ran away again and out of fear instantly disappeared again. ॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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