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श्लोक 3.43.16  |
यदि ग्रहणमभ्येति जीवन् नेव मृगस्तव।
आश्चर्यभूतं भवति विस्मयं जनयिष्यति॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| यदि तुम इस मृग को जीवित रहते ही पकड़ लोगे तो यह बड़ी अद्भुत बात होगी और सबके हृदय में विस्मय उत्पन्न हो जाएगा ॥16॥ |
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| If you catch this deer while it is still alive, it will be a wonderful thing and will create amazement in everyone's heart. ॥ 16॥ |
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