श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 42: मारीच का सुवर्णमय मृगरूप धारण करके श्रीराम के आश्रम पर जाना और सीता का उसे देखना  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  3.42.9-10h 
ततस्तथेत्युवाचैनं रावणं ताटकासुत:।
ततो रावणमारीचौ विमानमिव तं रथम्॥ ९॥
आरुह्याययतु: शीघ्रं तस्मादाश्रममण्डलात्।
 
 
अनुवाद
तब तत्पश्चात् तत्पश्चात् तत्पश्चात् तत्पश्चात् तत्पश्चात् रावण और मारीच दोनों उस विमानरूपी रथ पर बैठकर शीघ्र ही आश्रममण्डल से बाहर चले गए ॥9 1/2॥
 
Then Tatakakumar Marich said to Ravana - 'So be it'. Thereafter, both Ravana and Marich sat on that vimana-shaped chariot and quickly left the Ashram Mandal. 9 1/2॥
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