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श्लोक 3.42.27  |
मृगयूथैरनुगत: पुनरेव निवर्तते।
सीतादर्शनमाकांक्षन् राक्षसो मृगतां गत:॥ २७॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात् वह मृगों के समूह के साथ लौटता था। उस मृगरूपी राक्षस की एकमात्र इच्छा यही थी कि किसी प्रकार सीता की दृष्टि उस पर पड़ जाए॥ 27॥ |
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| Thereafter he would return with herds of deer. The only desire of that deer-like demon was that somehow Sita's sight should fall on him.॥ 27॥ |
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