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श्लोक 3.42.18  |
वैदूर्यसंकाशखुरस्तनुजङ्घ: सुसंहत:।
इन्द्रायुधसवर्णेन पुच्छेनोर्ध्वं विराजित:॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| उसके खुर लाजवर्द के समान थे, पिंडलियाँ पतली थीं और उसकी पूँछ इन्द्रधनुष के रंग की थी, जिससे उसका सुडौल शरीर अत्यन्त सुन्दर दिखाई देता था ॥18॥ |
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| Its hooves were like lapis lazuli stones, its calves were slender and its tail was of the colour of the rainbow, which made its well-formed body look very beautiful. ॥18॥ |
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