श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 42: मारीच का सुवर्णमय मृगरूप धारण करके श्रीराम के आश्रम पर जाना और सीता का उसे देखना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.42.18 
वैदूर्यसंकाशखुरस्तनुजङ्घ: सुसंहत:।
इन्द्रायुधसवर्णेन पुच्छेनोर्ध्वं विराजित:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उसके खुर लाजवर्द के समान थे, पिंडलियाँ पतली थीं और उसकी पूँछ इन्द्रधनुष के रंग की थी, जिससे उसका सुडौल शरीर अत्यन्त सुन्दर दिखाई देता था ॥18॥
 
Its hooves were like lapis lazuli stones, its calves were slender and its tail was of the colour of the rainbow, which made its well-formed body look very beautiful. ॥18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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