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श्लोक 3.42.12-13h  |
अवतीर्य रथात् तस्मात् तत: काञ्चनभूषणात्॥ १२॥
हस्ते गृहीत्वा मारीचं रावणो वाक्यमब्रवीत्। |
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| अनुवाद |
| तब रावण उस सुवर्ण-मंडित रथ से उतरा और मारीच का हाथ अपने हाथ में लेकर उससे बोला -॥12 1/2॥ |
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| Then Ravana descended from that gold-decorated chariot and taking Maricha's hand in his own said to him -॥ 12 1/2॥ |
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