श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 41: मारीच का रावण को विनाश का भय दिखाकर पुनः समझाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.41.9 
विपर्यये तु तत्सर्वं व्यर्थं भवति रावण।
व्यसनं स्वामिवैगुण्यात् प्राप्नुवन्तीतरे जना:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'रावण! यदि प्रभु की कृपा न हो तो सब कुछ व्यर्थ हो जाता है। राजा के दोषों के कारण अन्य लोगों को भी दुःख भोगना पड़ता है।॥9॥
 
‘Ravana! If the lord's grace is not there then everything becomes futile. Due to the faults of the king, other people also have to suffer.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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