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श्लोक 3.41.9  |
विपर्यये तु तत्सर्वं व्यर्थं भवति रावण।
व्यसनं स्वामिवैगुण्यात् प्राप्नुवन्तीतरे जना:॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| 'रावण! यदि प्रभु की कृपा न हो तो सब कुछ व्यर्थ हो जाता है। राजा के दोषों के कारण अन्य लोगों को भी दुःख भोगना पड़ता है।॥9॥ |
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| ‘Ravana! If the lord's grace is not there then everything becomes futile. Due to the faults of the king, other people also have to suffer.॥ 9॥ |
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