श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 41: मारीच का रावण को विनाश का भय दिखाकर पुनः समझाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.41.8 
धर्ममर्थं च कामं च यशश्च जयतां वर।
स्वामिप्रसादात् सचिवा: प्राप्नुवन्ति निशाचर॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'विजयी योद्धाओं में रात्रिचर श्रेष्ठ है! मंत्रीगण अपने स्वामी राजा की कृपा से ही धर्म, अर्थ, काम और यश प्राप्त करते हैं ॥8॥
 
'Nocturnal is the best among victorious warriors! Ministers attain religion, wealth, work and fame only by the grace of their master the king. 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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