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श्लोक 3.41.7  |
अमात्यै: कामवृत्तो हि राजा कापथमाश्रित:।
निग्राह्य: सर्वथा सद्भि: स निग्राह्यो न गृह्यसे॥ ७॥ |
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| अनुवाद |
| जो राजा स्वेच्छाचारी होकर कुमार्ग पर चलने लगे, उसे रोकने के लिए अच्छे मन्त्रियों को प्रयत्न करना चाहिए। तुम भी रोके जाने के योग्य हो; फिर भी वे मन्त्री तुम्हें नहीं रोक रहे हैं॥7॥ |
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| ‘Good ministers should try their best to stop a king who becomes willful and starts walking on the wrong path. You too are worthy of being stopped; yet those ministers are not stopping you.॥ 7॥ |
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