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श्लोक 3.41.11  |
राज्यं पालयितुं शक्यं न तीक्ष्णेन निशाचर।
न चातिप्रतिकूलेन नाविनीतेन राक्षस॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| 'रात्रि में विचरण करने वाले राक्षस! जो राजा अत्यंत तीक्ष्ण स्वभाव वाला, प्रजा से अत्यंत द्वेष रखने वाला और अभिमानी है, उसके द्वारा राज्य की रक्षा नहीं हो सकती॥11॥ |
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| 'Demons roaming about at night! A kingdom cannot be protected by a king whose nature is very sharp, who is very hostile towards the people and who is arrogant.॥ 11॥ |
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