vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 3: अरण्य काण्ड
»
सर्ग 41: मारीच का रावण को विनाश का भय दिखाकर पुनः समझाना
»
श्लोक 1
श्लोक
3.41.1
आज्ञप्तो रावणेनेत्थं प्रतिकूलं च राजवत्।
अब्रवीत् परुषं वाक्यं नि:शङ्को राक्षसाधिपम्॥ १॥
अनुवाद
जब रावण ने राजा के समान उसे ऐसी प्रतिकूल आज्ञा दी, तब मारीच ने निःसंदेह होकर राक्षसराज से कठोर शब्दों में कहा-॥1॥
When Ravana, like a king, gave him such an adverse order, then Maricha, without any doubt, said to the demon king in harsh words - ॥ 1॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd