श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 40: रावण का मारीच को फटकारना और सीताहरण के कार्य में सहायता करने की आज्ञा देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.40.9 
सम्पृष्टेन तु वक्तव्यं सचिवेन विपश्चिता।
उद्यताञ्जलिना राज्ञो य इच्छेद् भूतिमात्मन:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'अपने हित की इच्छा रखने वाले बुद्धिमान मंत्री को उचित है कि वह राजा के पूछने पर ही उससे अपनी बात कहे, और वह भी हाथ जोड़कर और नम्रतापूर्वक।॥9॥
 
'It is appropriate for a wise minister who seeks his own welfare to express his intentions to the king only when the king asks for them, and that too with folded hands and humility.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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