श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 40: रावण का मारीच को फटकारना और सीताहरण के कार्य में सहायता करने की आज्ञा देना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.40.8 
दोषं गुणं वा सम्पृष्टस्त्वमेवं वक्तुमर्हसि।
अपायं वा उपायं वा कार्यस्यास्य विनिश्चये॥ ८॥
 
 
अनुवाद
"यदि इस कार्य का निर्णय करने के लिए आपसे पूछा जाता कि 'इसमें क्या दोष है, इसका क्या गुण है, इसकी सिद्धि में क्या बाधा है अथवा इस कार्य को पूरा करने का क्या उपाय है' तो आपको ऐसी बातें कहनी चाहिए थीं ॥8॥
 
"If in order to decide on this task you were asked 'what is its flaw, what is its quality, what is the obstacle in its accomplishment or what is the way to accomplish this task' then you should have said such things. ॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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