श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 40: रावण का मारीच को फटकारना और सीताहरण के कार्य में सहायता करने की आज्ञा देना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.40.4 
त्वद्वाक्यैर्न तु मां शक्यं भेत्तुं रामस्य संयुगे।
मूर्खस्य पापशीलस्य मानुषस्य विशेषत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
‘तुम्हारे वचन मुझे उस मूर्ख, पापी और विशेष मनुष्य राम से युद्ध करने अथवा उसकी पत्नी का अपहरण करने के मेरे निश्चय से विचलित नहीं कर सकते।॥4॥
 
‘Your words cannot deter me from my resolve to fight with that foolish, sinful and especially human being Rama or to abduct his wife.॥ 4॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd