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श्लोक 3.40.4  |
त्वद्वाक्यैर्न तु मां शक्यं भेत्तुं रामस्य संयुगे।
मूर्खस्य पापशीलस्य मानुषस्य विशेषत:॥ ४॥ |
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| अनुवाद |
| ‘तुम्हारे वचन मुझे उस मूर्ख, पापी और विशेष मनुष्य राम से युद्ध करने अथवा उसकी पत्नी का अपहरण करने के मेरे निश्चय से विचलित नहीं कर सकते।॥4॥ |
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| ‘Your words cannot deter me from my resolve to fight with that foolish, sinful and especially human being Rama or to abduct his wife.॥ 4॥ |
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