श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 40: रावण का मारीच को फटकारना और सीताहरण के कार्य में सहायता करने की आज्ञा देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.40.26 
नो चेत् करोषि मारीच हन्मि त्वामहमद्य वै।
एतत् कार्यमवश्यं मे बलादपि करिष्यसि।
राज्ञो विप्रतिकूलस्थो न जातु सुखमेधते॥ २६॥
 
 
अनुवाद
'मारीच! यदि तू मना करेगा, तो मैं अभी तुझे मार डालूँगा। तुझे मेरा यह काम करना ही होगा। मैं बल प्रयोग करके भी तुझसे यह काम करवाऊँगा। राजा के विरुद्ध जाने वाला मनुष्य कभी सुखी नहीं होता॥ 26॥
 
‘Marich! If you refuse, I will kill you right now. You will have to do this work of mine. I will make you do this even by using force. A man who goes against the king is never happy.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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