श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 40: रावण का मारीच को फटकारना और सीताहरण के कार्य में सहायता करने की आज्ञा देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.40.21 
तच्छ्रुत्वा रामपदवीं सीतया च प्रचोदित:।
अनुगच्छति सम्भ्रान्त: सौमित्रिरपि सौहृदात्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'सीताजी से प्रेरित होकर आपकी पुकार सुनकर सुमित्रापुत्र लक्ष्मण भी स्नेह से भयभीत होकर अपने भाई के मार्ग का अनुसरण करेंगे।
 
'Hearing your call, inspired by Sita, Sumitra's son Lakshmana too, frightened by affection, will follow his brother's path.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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