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श्लोक 3.40.20  |
अपक्रान्ते च काकुत्स्थे दूरं गत्वाप्युदाहर।
हा सीते लक्ष्मणेत्येवं रामवाक्यानुरूपकम्॥ २०॥ |
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| अनुवाद |
| 'जब राम तुम्हें पकड़ने के लिए आश्रम से बहुत दूर चले जाएँ, तब तुम भी दूर जाकर उन्हें श्री राम के समान स्वर में पुकारना - "हा सीता! हा लक्ष्मण!" कहना॥ 20॥ |
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| 'When Rama goes far away from the ashram to catch you, you too go far away and call out to him in the same tone as Shri Ram - saying, "Ha Sita! Ha Lakshman!"॥ 20॥ |
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