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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 3: अरण्य काण्ड
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सर्ग 40: रावण का मारीच को फटकारना और सीताहरण के कार्य में सहायता करने की आज्ञा देना
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श्लोक 10
श्लोक
3.40.10
वाक्यमप्रतिकूलं तु मृदुपूर्वं शुभं हितम्।
उपचारेण वक्तव्यो युक्तं च वसुधाधिप:॥ १०॥
अनुवाद
‘राजा से ऐसी बातें कहनी चाहिए जो अनुकूल, मधुर, अच्छी, हितकारी, आदर देने वाली और उचित हों।॥10॥
‘One should say such things to the king that are favourable, sweet, good, beneficial, respectful and appropriate.॥ 10॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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