श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 4: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा विराध का वध  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.4.6 
स भग्नबाहु: संविग्न: पपाताशु विमूर्च्छित:।
धरण्यां मेघसंकाशो वज्रभिन्न इवाचल:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
भुजाएं टूट जाने से बादल के समान काला वह राक्षस व्याकुल हो गया और शीघ्र ही अचेत होकर पृथ्वी पर गिर पड़ा, मानो वज्र से टूटा हुआ पर्वत शिखर हो।
 
With his arms broken, the demon as black as a cloud became agitated and soon fell to the earth, unconscious, like a mountain peak broken by a thunderbolt.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)