श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 4: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा विराध का वध  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.4.16 
अभिशापादहं घोरां प्रविष्टो राक्षसीं तनुम्।
तुम्बुरुर्नाम गन्धर्व: शप्तो वैश्रवणेन हि॥ १६॥
 
 
अनुवाद
'मुझे शाप के कारण यह भयंकर राक्षस रूप धारण करना पड़ा। मैं तुम्बुरु नामक गंधर्व हूँ। कुबेर ने मुझे राक्षस होने का शाप दिया था।॥16॥
 
‘I had to take on this terrible demon form due to a curse. I am a Gandharva named Tumburu. Kubera had cursed me to become a demon.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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