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श्लोक 3.4.13  |
तच्छ्रुत्वा राघवेणोक्तं राक्षस: प्रश्रितं वच:।
इदं प्रोवाच काकुत्स्थं विराध: पुरुषर्षभम्॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान् रामजी के ये वचन सुनकर राक्षस विराध ने महापुरुष भगवान् रामजी से ये विनम्र वचन कहे-॥13॥ |
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| On hearing these words of Lord Rama, the demon Viradh said these humble words to the great man Lord Rama -॥ 13॥ |
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