श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 4: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा विराध का वध  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.4.1 
ह्रियमाणौ तु काकुत्स्थौ दृष्ट्वा सीता रघूत्तमौ।
उच्चै: स्वरेण चुक्रोश प्रगृह्य सुमहाभुजौ॥ १॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर कि राक्षस रघुवंश के श्रेष्ठ योद्धा श्री राम और लक्ष्मण को ले जा रहे हैं, ककुत्स्थ कुल के रत्न - सीता ने अपनी भुजाएँ ऊपर उठाईं और जोर-जोर से रोने और चीखने लगीं -॥1॥
 
Seeing that the demons were carrying away Shri Ram and Lakshman, the best warriors of the Raghuvansha, the jewels of the Kakutstha clan - Sita raised her arms and started crying and screaming loudly -॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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