| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 3: अरण्य काण्ड » सर्ग 39: मारीच का रावण को समझाना » श्लोक 23 |
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| | | | श्लोक 3.39.23  | रामश्च हि महातेजा महासत्त्वो महाबल:।
अपि राक्षसलोकस्य भवेदन्तकरोऽपि हि॥ २३॥ | | | | | | अनुवाद | | क्योंकि श्री रामचन्द्रजी अत्यन्त तेजस्वी, महान् आत्मविश्वास से युक्त और महाबलशाली हैं। वे सम्पूर्ण राक्षस जगत् का नाश कर सकते हैं॥ 23॥ | | | | 'Because Shri Ramchandraji is very radiant, endowed with great self-confidence and very powerful. He can destroy the entire demon world.॥ 23॥ | | ✨ ai-generated | | |
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