| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 3: अरण्य काण्ड » सर्ग 39: मारीच का रावण को समझाना » श्लोक 22 |
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| | | | श्लोक 3.39.22  | सोऽहं परापराधेन विनशेयं निशाचर।
कुरु यत् ते क्षमं तत्त्वमहं त्वां नानुयामि वै॥ २२॥ | | | | | | अनुवाद | | 'निश्चर! मैं भी किसी प्रकार दूसरों के अपराधों से नष्ट हो सकता हूँ, अतः तुम जो उचित समझो, वही करो। मैं इस कार्य में तुम्हारा साथ नहीं दे सकता।॥ 22॥ | | | | 'Nishchar! I too can be destroyed by the crimes of others in some way, so do whatever you think is right. I cannot support you in this task.॥ 22॥ | | ✨ ai-generated | | |
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