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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 3: अरण्य काण्ड
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सर्ग 39: मारीच का रावण को समझाना
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श्लोक 18
श्लोक
3.39.18
रकारादीनि नामानि रामत्रस्तस्य रावण।
रत्नानि च रथाश्चैव वित्रासं जनयन्ति मे॥ १८॥
अनुवाद
'रावण! मैं राम से इतना डरता हूँ कि रत्न, रथ आदि के नाम सुनते ही मेरे मन में बड़ा भय उत्पन्न हो जाता है।
'Ravana! I am so afraid of Rama that the very names of gems, chariots, etc., create immense fear in my mind when they reach my ears.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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