Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 3.39.14: इस बार मैं किसी प्रकार राम के बाण से छूट गया और मुझे नया जीवन मिला। तब से मैंने संन्यास ले लिया, सब बुरे कर्म त्याग दिए, मन में दृढ़ निश्चय कर लिया और योगाभ्यास द्वारा तपस्या में लग गया॥ 14॥   |   ramayan सर्ग 3.39: मारीच का रावण को समझाना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 39: मारीच का रावण को समझाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.39.14 
शरेण मुक्तो रामस्य कथंचित् प्राप्य जीवितम्।
इह प्रव्राजितो युक्तस्तापसोऽहं समाहित:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
इस बार मैं किसी प्रकार राम के बाण से छूट गया और मुझे नया जीवन मिला। तब से मैंने संन्यास ले लिया, सब बुरे कर्म त्याग दिए, मन में दृढ़ निश्चय कर लिया और योगाभ्यास द्वारा तपस्या में लग गया॥ 14॥
 
'This time, somehow I got free from Rama's arrow and got a new life. From then on, I took sanyaas (renunciation of worldly things), abandoned all bad deeds, became steadfast in my mind and engaged myself in austerities by practising Yoga.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)