श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 38: श्रीराम की शक्ति के विषय में अपना अनुभव बताकर मारीच का रावण को उनका अपराध करने से मना करना  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  3.38.5-6h 
इत्येवमुक्तो धर्मात्मा राजा दशरथस्तदा॥ ५॥
प्रत्युवाच महाभागं विश्वामित्रं महामुनिम्।
 
 
अनुवाद
'जब मुनि ने ऐसा कहा, तब धर्मात्मा राजा दशरथ ने भाग्यशाली मुनि विश्वामित्र को इस प्रकार उत्तर दिया -
 
‘When the sage said this, the righteous king Dasharath then replied to the fortunate sage Vishwamitra in this manner -
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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