श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 38: श्रीराम की शक्ति के विषय में अपना अनुभव बताकर मारीच का रावण को उनका अपराध करने से मना करना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.38.32 
कलत्राणि च सौम्यानि मित्रवर्गं तथैव च।
यदीच्छसि चिरं भोक्तुं मा कृथा रामविप्रियम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
'यदि तुम अपनी सुन्दर पत्नियों और मित्रों का दीर्घकाल तक संग करना चाहते हो, तो भगवान् राम को नाराज मत करो॥ 32॥
 
'If you want to enjoy the company of your beautiful wives and friends for a longer period, then do not offend Lord Rama.॥ 32॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd