श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 38: श्रीराम की शक्ति के विषय में अपना अनुभव बताकर मारीच का रावण को उनका अपराध करने से मना करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.38.28 
हृतदारान् सदारांश्च दश विद्रवतो दिश:।
हतशेषानशरणान् द्रक्ष्यसि त्वं निशाचरान्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
'तुम यह भी देखोगे कि बहुत से राक्षसों की स्त्रियाँ हरण कर ली गई हैं और कुछ की स्त्रियाँ अभी भी उनके पास हैं, और वे युद्ध में मरते-मरते बचकर असहाय होकर सब दिशाओं में भाग रहे हैं॥ 28॥
 
'You will also see that the wives of many demons have been abducted and some still have their wives with them, and having escaped death in the war, they are running helplessly in all directions.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)