श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 38: श्रीराम की शक्ति के विषय में अपना अनुभव बताकर मारीच का रावण को उनका अपराध करने से मना करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.38.22 
एवमस्मि तदा मुक्त: सहायास्ते निपातिता:।
अकृतास्त्रेण रामेण बालेनाक्लिष्टकर्मणा॥ २२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैं उस समय मृत्यु से बच गया। उन दिनों अनायास ही महान् कर्म करने वाले श्री रामजी बालक ही थे और उन्हें अस्त्र-शस्त्र चलाने का पूर्ण अभ्यास भी नहीं हुआ था। फिर भी उन्होंने मेरे साथ गए हुए मेरे समस्त सहायकों को मार डाला॥ 22॥
 
'This way I was saved from death at that time. In those days, Shri Ram, who performed great deeds without any effort, was still a child and he was not fully practised in using weapons. Even then, he killed all my helpers who had gone with me.॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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