श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 38: श्रीराम की शक्ति के विषय में अपना अनुभव बताकर मारीच का रावण को उनका अपराध करने से मना करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.38.14 
अजातव्यञ्जन: श्रीमान् बाल: श्याम: शुभेक्षण:।
एकवस्त्रधरो धन्वी शिखी कनकमालया॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'उस समय तक श्री राम में युवावस्था के लक्षण प्रकट नहीं हुए थे। (वे किशोरावस्था में थे।) वे एक सुन्दर बालक के समान दिखते थे। उनका शरीर श्याम वर्ण का था और उनके नेत्र अत्यंत सुन्दर थे। वे एक ही वस्त्र पहने हुए थे, हाथ में धनुष लिए हुए थे और सुन्दर शिखा तथा स्वर्ण हार से सुशोभित थे।॥14॥
 
‘Till that time the signs of youth had not appeared in Shri Ram. (He was in his teens.) He looked like a beautiful child. His body was dark in colour and his eyes were very beautiful. He wore a single robe, held a bow in his hand and was adorned with a beautiful crest and a golden necklace.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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