Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.37.9: 'कौसल्या का आनन्द बढ़ाने वाले श्री राम अपने धर्म-गुणों में कभी हीन नहीं हुए हैं। उनका स्वभाव भी किसी जीव के प्रति कठोर नहीं है। वे समस्त जीवों के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। 9॥ | ramayan सर्ग 3.37: मारीच का रावण को श्रीरामचन्द्रजी के गुण और प्रभाव बताकर सीताहरण के उद्योग से रोकना । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न च धर्मगुणैर्हीन: कौसल्यानन्दवर्धन:।
न च तीक्ष्णो हि भूतानां सर्वभूतहिते रत:॥ ९॥
अनुवाद
'कौसल्या का आनन्द बढ़ाने वाले श्री राम अपने धर्म-गुणों में कभी हीन नहीं हुए हैं। उनका स्वभाव भी किसी जीव के प्रति कठोर नहीं है। वे समस्त जीवों के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। 9॥
'Shri Ram, who enhances the joy of Kausalya, has not been inferior in his religious qualities. His nature is also not harsh towards any living being. They are always ready for the welfare of all living beings. 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥