श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 37: मारीच का रावण को श्रीरामचन्द्रजी के गुण और प्रभाव बताकर सीताहरण के उद्योग से रोकना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.37.19 
तस्य वै नरसिंहस्य सिंहोरस्कस्य भामिनी।
प्राणेभ्योऽपि प्रियतरा भार्या नित्यमनुव्रता॥ १९॥
 
 
अनुवाद
श्री रामचंद्रजी मनुष्यों में सिंह के समान पराक्रमी हैं। उनकी छाती सिंह के समान ऊँची है। भामिनी सीता उनकी प्राणों से भी अधिक प्रिय पत्नी हैं। वे सदैव अपने पति का अनुसरण करती हैं॥19॥
 
‘Sri Ramachandraji is as valiant as a lion among men. His chest is as elevated as that of a lion. Bhamini Sita is his dearer wife than his life. She always follows her husband.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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